Lion Piprimul Churna (100 g) de Neel Ayurvedics
Étapes – Étapes
1. Étape 1. प्रसव : प्रसव के समय पिपरा मूल के साथ दालचीनी का Version 1.20 Version actuelle देकर प्रसूता को पिलाते हैं। इससे प्रसव (बच्चे का जन्म) आराम से होता है।
2. Il y a 5 ans: 5 ans, 5 ans ग्राम, 5 jours, 5 jours, 5 jours, 5 jours 5 jours plus tard साथ पीसकर रूई की बत्ती बनाकर योनि में रखने से योनि के दर्द दूर हो जाता है।
3. मुर्च्छा (बेहोशी) : पीपरामूल और सर्पगन्धा को महीन पीसकर चूर्ण बना लें, इस चूर्ण को लगभग 1 sec 2 ग्राम सौंफ के रस के साथ सुबह शाम रोगी को खिलाने से बेहोशी निश्चित रूप से दूर हो जाती है।
4. दिल की तेज धड़कन: पीपरा मूल और छोटी इलायची 25-25 heures du matin लें। 3 jours plus tard सेवन करने से कब्ज की समस्या से उत्पन्न हृदय रोगों में लाभ होता है।
5. हृदय की दुर्बलता : पिप्पली चूर्ण लगभग आधा ग्राम का सेवन शहद के साथ करने से हृदय की दुर्बलता मिटती है साथ ही यह कॉलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करने में भी पूर्ण सक्षम होता है।
6. Voici ce qu’il en est :
- पीपला मूल तथा छोटी इलायची का चूर्ण आधा चम्मच देशी घी के साथ चाटने से हृदय रोग दूर हो जाता है।
- पिप्पली फल, एलाबीज, वचा प्रकन्द, हींग घी में भुना हुआ, यवक्षार, सेंधानमक, संचर नमक, शुंठी एवं अजमोद फल को बराबर मात्रा में लेकर बारीक चूर्ण बना लें, फिर इसके 1 et 3 et 3 et 3 दाड़िम या बिजौरा या नारंगी के रस या उपयुक्त शहद के साथ Il y a 2 jours
- Il y a 10 heures et il y a 10 heures. चूर्ण मिलाकर प्रतिदिन 2 sec. के दूध के साथ सेवन करने से हृदय के दर्द में लाभ होता है।
7. हिस्टीरिया (गुल्यवायु): 5 jours, 15 Il y a 20 ans, il y a 20 ans, फिर इस पानी में मिलाकर चने के बराबर आकार की गोलियां बनाकर छाया में सुखा लें। 2ème partie 3ème partie 3ème partie हिस्टीरिया रोग ठीक हो जाता है।
8. Nombre : 6 jours et 8 jours में मिलाकर रोगी को चटाने से गंडमाला और कण्ठ शालूक (गले में गांठ) ठीक हो जाती हैं।
9. गले के रोग : 10-10 ग्राम पीपरामूल, अमलवेत, सोंठ, कालीमिर्च, छोटी पीपल, तेजपात (तेजपत्ता), समी का दाना, इलायची का दाना, तालीसपत्र, दालचीनी, सफेद जीरा, चित्रक की जड़ की छाल को लेकर बारीक पीसकर चूर्ण बना लें। इस चूर्ण में कम से कम एक साल पुराना गुड़ मिलाकर रख दें। 4 ग्राम सुबह शाम गाय के दूध के साथ खाने से बिगड़ा हुआ जुकाम, खांसी और स्वर-भेद (गला बैठ जाना) ठीक हो जाता है।








